हड़प्पा सभ्यता HADAPPA CULTURE

हड़प्पा सभ्यता

हड़प्पा सिंधु घाटी सभ्यता का उदय ताम्र पाषाणीक लेक पृष्ठभूमि पर उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में हुआ इसका नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा क्योंकि इसका पता सबसे पहले 1921 में पाकिस्तान के पश्चिम पंजाब प्रांत में स्थित हड़प्पा से चला था

इसका भालू भौगोलिक क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर आकार त्रिभुजाकार तथा इसके अंतर्गत पंजाब सिंध बलूचिस्तान अफगानिस्तान गुजरात राजस्थान हरियाणा तथा पश्चिम उत्तर प्रदेश के भाग आते हैं पूर्व से पश्चिम तक 1600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण तक 1400 किलोमीटर तक इसका विस्तार है इसके विकास को तीन चरणों में बांटा जा सकता है

आरंभिक हड़प्पा सभ्यता 3500 से 2600 ई पू

पूर्ण विकसित सभ्यता 2600-1800 ई पू

उत्तर हड़प्पा सभ्यता 1800ई पू से आगे तक


हड़प्पा सभ्यता एक कांस्य युगीन सभ्यता है जिसे आज दिया इतिहास के अंतर्गत माना जाता है हड़प्पा टीले का सर्वप्रथम उल्लेख 1826 में कराची और लाहौर के बीच रेल पटरी बिछाने के दौरान जॉन ब्रंटन और विलियम ब्रंटन ने किया 1922 में मोहनजोदड़ो की हुई खुदाई के आधार पर 1924 में भारतीय पुरातत्व विभाग के महानिदेशक जॉन मार्शल ने इस सभ्यता की घोषणा की|

सामाजिक स्थिति

  • सेंधव समाज मात्री प्रधान था नगरों के भग्नावशेष ओं से पता चलता है कि शहरों के लोग विलासिता पूर्ण जीवन जीते थे तथा विभिन्न वर्गों का अस्तित्व था समाज के व्यापारी वर्ग सबसे प्रभावशाली था कृषक शिल्पकार मजदूर सम्मानीय लोग थे तथा चिकित्सक पुरोहित अधिकारी शिक्षित वर्ग थ
  • इस समय सूची एवं उन्हीं वस्तुओं का प्रयोग किया जाता था
  • हड़प्पा के श्रमिक बस्तियों के अवशेष यहां दास प्रथा का संकेत देते हैं
  • शाकाहार तथा मांसाहार दोनों प्रकार का प्रचलन था गेहूं जो खरबूज तरबूज नारियल नींबू अनार भेड़ बकरी सूअर मुर्गी बटक आदि का उल्लेख मिलता है
  • योद्धा वर्ग के अस्तित्व का साक्ष्य नहीं है दस्त कारों ने कुम्हारों को समाज में विशेष स्थान प्राप्त था हड़प्पा में दुर्ग के बाहर मिले सार्वजनिक अन्ना भार के पास मिले घटिया प्रकार के आवासों से विदित होता है कि उनमें दास या बंधुआ मजदूर रहते थे कालीबंगा तथा लोथल से ऐसी आवाज नहीं मिले हैं
  • काजल पाउडर लिपस्टिक दर्पण आदि से इनकी सौंदर्य प्रीता की जानकारी मिलती है मनोरंजन के लिए नृत्य संगीत पासा शिकार मछली पकड़ना आदि से परिचित थे

आर्थिक की स्थिति

हड़प्पा कालीन अर्थव्यवस्था सिंचित कृषि अधिशेष पशुपालन विभिन्न प्रकारों में दक्षता और समृद्ध आंतरिक और बाय्ह व्यापार पर आधारित थी|

कृषि

  • शैन्धव लोगों का मुख्य पेशा कृषि कार्य था गेहूं और जौ प्रमुख फसलें तथा मटर सरसों तिल आदि अन्य फसलें थी
  • चावल के अवशेष लोथल एवं रंगपुर में मिले थे लोथल में आटा पीसने की चक्की मिली है
  • कृषि कार्य हेतु प्रस्तर एवं का संयोजन को प्रयोग किया जाता था कालीबंगा से जूते हुए खेत एवं बनवारी से मिट्टी का हल जैसा खिलौनों का हुआ था
  • कपास की खेती सर्वप्रथम यही शुरू की गई नहरों के साक्ष्य नहीं मिले हैं उर्वरक के प्रयोग का प्रमाण नहीं मिले

पशुपालन

बैल भैंस गाय भेड़ बकरी कुत्ते गधे कचरी जानवर पर जाते थे लोथल एवं पूर्व से घोड़े की मृण्मूर्तियां तथा सुरकोटदा से घोड़े के प्रति पंजाब प्राप्त हुए हैं परंतु खोड़े पालने का स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला है हाथी को पालतू बनाया गया था

उद्योग

  • हड़प्पा सभ्यता की विशाल की इमारतों से राजगिरी का प्रमाण मिलता है मोहनजोदड़ो से ईद के भक्तों के अवशेष मिले हैं हड़प्पाई लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था
  • लेकिन वह तो हमें तीन मिलाकर कहां से बनाना जानते थे
  • यह नाव बनाने के साक्ष्य मिले हैं धातुओं से लघु मूर्तियां बनाने के लिए मोम सांचा विधि प्रचलित थी
  • इस सभ्यता का प्रमुख उद्योग सूती वस्त्र निर्माण तथा मुद्रा निर्माण मूर्ति निर्माण आभूषण एवं उनके बनाने के साथ से ही मिलते हैं भारत निर्माण भी अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवसाय था

कला एवं शिल्प

सेंधव लोग कलाकृतियों के निर्माण के लिए धातु क्यों पत्थरों का उपयोग कम करते थे सबसे प्रसिद्ध कला के द्वितीय मोहनजोदड़ो से प्राप्त नृत्य की मूर्ति मुद्रा में नग्न स्त्री की कांस्य प्रतिमा अन्य प्रसिद्ध कलाकृतियां है हड़प्पा एवं चंन्हूदडो से प्राप्त कैसे की गाड़ियां मोहनजोदड़ो से प्राप्त दाढ़ी वाले सिर की पत्थर की मूर्ति स्वास्तिक चिन्ह मोहनजोदड़ो से प्राप्त हाथी दांत पर मानव चित्र

व्यापार

  • सिंधु सभ्यता के लोगों के जीवन में व्यापार का बड़ा महत्व था इसकी पुष्टि हड़प्पा मोहनजोदड़ो तथा लोथल अनाज के बड़े-बड़े कोठरो तथा ढेर सारी सीलो एक रुप लिपि और मानकीकृत माप तौल के अस्तित्व से होती है
  • देसी और विदेशी दोनों प्रकार के व्यापार उन्नत अवस्था में था
  • व्यापार विनिमय प्रणाली पर आधारित व्यापार संबंधों का विस्तार अफगानिस्तान ईरान एवं मध्य एशिया के साथ गुजरात चावल लोथल व सुरकोटडासे कपास अन्य क्षेत्र में भेजे जाते थे ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों को अनाज भेजे जाते थे नगरों से आभूषण औजार बन के कपड़े आदि क्षेत्र मैं भेजे जाते थे

हड़प्पा मोहनजोदड़ो ओर अन्य प्रमुख नगर पकाई गयी ईट से पूणँतः बने थे जबकि कालीबंगा व रंगपुर नगर कच्छी ईटो का प्रयोग नालियों को ढकने के लिये किया जाता था

मोहनजोदड़ो से मिली हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी ईट 51 सेमी× 26.27 सेमी के आकार की थी।

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