🪔 राजिम माघी पुन्नी मेला 2026: जाने की तारीख, मुख्य आकर्षण और पूरी जानकारी

Rajim Maghi Punni Mela 2026 dates

Rajim Maghi Punni Mela 2026 dates और इस भव्य उत्सव की विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए छत्तीसगढ़ की पावन धरा एक बार फिर सजने को तैयार है। जब माघ की पूर्णिमा का चांद अपनी पूरी आभा बिखेरता है, तो महान नदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पावन संगम पर एक अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव का जन्म होता है। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित राजिम को ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ कहा जाता है, और यहाँ आयोजित होने वाला यह मेला राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का सबसे बड़ा स्तंभ है।

दरअसल, राजिम का यह मेला केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी लोक कला, परंपरा और आपसी भाईचारे का वो संगम है जो हज़ारों सालों से अबाध गति से बह रहा है। यदि आप 2026 में इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने की योजना बना रहे हैं, तो “Explore Chhattisgarh” की यह विशेष गाइड आपके लिए हर उस जानकारी का द्वार खोलेगी जिसकी आपको आवश्यकता है।

ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व ( maghi mela history )

मान्यता है कि प्राचीन काल में भगवान विष्णु के कमल चरण यहाँ पड़े थे, जिसकी स्मृति में यहाँ भव्य राजीव लोचन मंदिर का निर्माण हुआ। 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच निर्मित यह मंदिर अपनी शिल्पकारी के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इतिहासकार बताते हैं कि संगम के बीचों-बीच स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर सदियों से बाढ़ के थपेड़ों को सहते हुए भी अडिग खड़ा है, जो प्राचीन इंजीनियरिंग का एक अद्भुत प्रमाण है।

परंपरा का स्वरूप ( Rajim Mela )

प्राचीन समय में यह मेला स्थानीय लोगों के लिए एक प्रमुख धार्मिक पड़ाव था। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस 15 दिवसीय मेले को पहले ‘पुन्नी मेला’ कहा जाता था, जिसे बीच में ‘राजिम कुंभ’ का नाम भी दिया गया, लेकिन अब यह फिर से अपनी पारंपरिक पहचान ‘माघी पुन्नी मेला’ के रूप में जाना जाता है।

📅 राजिम मेला 2026 कब है: महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)

सबसे पहला और बड़ा सवाल जो हर श्रद्धालु और पर्यटक के मन में होता है, वह है— rajim mela kab se hai 2026? Rajim Mela 2026 kab hai? Rajim Maghi Punni Mela 2026 dates की बात करें, तो परंपरा के अनुसार यह मेला हर साल माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) से शुरू होता है और महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) के पावन पर्व तक चलता है।

  • मेले का शुभारंभ (Opening): वर्ष 2026 में मेले की शुरुआत 1 फरवरी 2026 (संभावित) को माघ पूर्णिमा के प्रथम ‘शाही स्नान’ के साथ होगी।
  • मेले का समापन (Closing): इस 15 दिवसीय महोत्सव का औपचारिक समापन 15 फरवरी 2026 (संभावित) को महाशिवरात्रि के दिन होगा।

इन 15 दिनों के दौरान राजिम की धरती कभी सोती नहीं है। दिन में मंदिरों की घंटियाँ और रात में छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों की थिरकन इस शहर को जीवंत बनाए रखती है।

🌊 त्रिवेणी संगम: जहाँ तीन नदियाँ और करोड़ों आस्थाएं मिलती हैं

राजिम की सबसे बड़ी विशेषता इसका त्रिवेणी संगम है। यहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का मिलन होता है। हिंदू धर्म में संगम स्नान का अत्यधिक महत्व माना गया है। चूंकि राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग माना जाता है, इसलिए यहाँ स्नान करने का फल उतना ही मिलता है जितना कि इलाहाबाद (प्रयागराज) में मिलता है।

मेले के दौरान लाखों की संख्या में नागा साधु, संत और आम लोग इस संगम में डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु साक्षात यहाँ उपस्थित होते हैं, इसलिए इस दिन किए गए स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।

🗿 मुख्य आकर्षण: कुलेश्वर महादेव और राजीव लोचन मंदिर

Rajim Maghi Punni Mela 2026 की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप यहाँ के प्राचीन मंदिरों के दर्शन न कर लें। यहाँ के मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि स्थापत्य कला (Architecture) के बेजोड़ नमूने भी हैं।

1. कुलेश्वर महादेव मंदिर (Kuleshwar Mahadev Temple)

Beautiful Kuleshwar Mahadev Temple in the middle of Mahanadi river Rajim
credit –

यह मंदिर राजिम की पहचान है। दरअसल, कुलेश्वर महादेव मंदिर त्रिवेणी संगम के बिल्कुल मध्य में एक ऊंचे अष्टकोणीय चबूतरे पर स्थित है।

  • रहस्य: कहा जाता है कि जब वनवास के दौरान माता सीता यहाँ आई थीं, तो उन्होंने रेत से महादेव की पार्थिव शिवलिंग बनाई थी। मानसून के समय जब नदियाँ उफान पर होती हैं, तो पूरा मंदिर पानी से घिर जाता है, लेकिन मंदिर को कभी कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
  • अनुभव: मेले के दौरान संगम से पैदल चलकर या नाव द्वारा इस मंदिर तक पहुँचना एक अलग ही रोमांच भर देता है।

2. भगवान राजीव लोचन मंदिर (Rajiv Lochan Temple)

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। 7वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर अपनी नक्काशीदार दीवारों और खंभों के लिए जाना जाता है।

  • मान्यता: कहा जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा यहाँ ‘राजीव लोचन’ (कमल के समान नयन वाले) के रूप में की जाती है। इस मंदिर के दर्शन के बिना राजिम की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती। मेले के दौरान यहाँ विशेष श्रृंगार और भोग का आयोजन होता है।

✨ मेले के मुख्य आकर्षण: क्यों आएं राजिम मेला 2026? ( rajim mela 2026 )

अगर आप Rajim Maghi Punni Mela 2026 dates देख रहे हैं, तो आपको इसके आकर्षणों के बारे में भी जानना चाहिए:

  1. महानदी आरती: जैसे बनारस में गंगा आरती होती है, वैसे ही राजिम में महानदी की भव्य आरती की जाती है। हज़ारों दीयों की रोशनी जब पानी पर तैरती है, तो वह नज़ारा दिव्य होता है।
  2. सांस्कृतिक कार्यक्रम: मेले के मुख्य मंच पर छत्तीसगढ़ के नामी लोक कलाकार जैसे पंडवानी, पंथी नृत्य और सुआ नृत्य की प्रस्तुतियां देते हैं।
  3. मीना बाज़ार और शिल्प: मेले में एक विशाल बाज़ार सजता है जहाँ छत्तीसगढ़ी हस्तशिल्प, डोकरा आर्ट और स्थानीय व्यंजन (जैसे भजिया, चीला, फरा) का लुत्फ उठाया जा सकता है।
  4. साधु-संतों का समागम: यहाँ विशेष ‘संत समागम’ होता है, जहाँ आप देशभर से आए विद्वान संतों के प्रवचन सुन सकते हैं।

🗺️ रायपुर से राजिम कैसे पहुँचें (Travel Guide)

राजिम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बहुत करीब है, इसलिए यहाँ पहुँचना अत्यंत सुगम है।

🚗 रायपुर से राजिम: यात्रा मार्गदर्शिका

🚌 सड़क मार्ग (By Road): रायपुर से राजिम की दूरी मात्र 45-50 किमी है। रायपुर के ‘नया रायपुर’ (Naya Raipur) मार्ग से होते हुए आप मात्र 1 से 1.5 घंटे में राजिम पहुँच सकते हैं। मेले के दौरान रायपुर के मुख्य बस स्टैंड (Pandri/Bhatagaon) से हर 15 मिनट में विशेष बसें चलती हैं।
✈️ हवाई मार्ग (By Air): निकटतम एयरपोर्ट रायपुर का ‘स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट’ है। एयरपोर्ट से राजिम की दूरी करीब 40 किमी है। आप सीधे एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर राजिम मेले में पहुँच सकते हैं।
🚆 रेल मार्ग (By Rail): मुख्य रेलवे स्टेशन रायपुर जंक्शन है। रायपुर से राजिम के लिए छोटी रेल (Narrow Gauge) कभी चलती थी, लेकिन वर्तमान में सड़क मार्ग ही सबसे तेज़ और आरामदायक है।

🧭 लोकेशन मैप (Location Map)

🎒 30+ प्रो-टिप्स: राजिम माघी पुन्नी मेला 2026 की सफल यात्रा के लिए

मेले की भीड़ और भव्यता को देखते हुए ये टिप्स आपके बहुत काम आएंगे:

  1. जल्दी पहुँचें: शाही स्नान के दिन सुबह 4 बजे ही संगम पर पहुँच जाएं, वरना भीड़ इतनी बढ़ जाएगी कि घाट तक पहुँचना मुश्किल होगा।
  2. शाही स्नान की तारीखें: मेले के दौरान तीन मुख्य स्नान होते हैं—माघ पूर्णिमा, जानकी जयंती और महाशिवरात्रि। इन दिनों पर विशेष ध्यान दें।
  3. आंतरिक लिंक: राजिम के बाद आप धमतरी के Sitanadi Wildlife Sanctuary का प्लान बना सकते हैं जो यहाँ से करीब 2 घंटे दूर है।
  4. मोबाइल नेटवर्क: मेले में लाखों लोग होते हैं, इसलिए नेटवर्क जैम हो सकता है। अपने ग्रुप से बिछड़ने पर मिलने का एक ‘लैंडमार्क’ तय कर लें।
  5. जूते: आपको काफी पैदल चलना होगा, इसलिए आरामदायक सैंडल या चप्पल पहनें। मंदिरों में जूते उतारने पड़ेंगे।
  6. पार्किंग: मेले के मुख्य क्षेत्र से 1-2 किमी पहले ही गाड़ियाँ रोक दी जाती हैं। पैदल चलने के लिए तैयार रहें।
  7. स्थानीय भोजन: राजिम के प्रसिद्ध ‘गुलगुला भजिया’ और ‘दही-कचौड़ी’ को ज़रूर आज़माएँ।
  8. सावधान: नदी के गहरे पानी में न जाएं। प्रशासन द्वारा लगाए गए ‘बैरिकेड्स’ का पालन करें।
  9. कपड़े: फरवरी में छत्तीसगढ़ में सुबह-शाम हल्की ठंड और दिन में धूप होती है। हल्के सूती कपड़े और एक पतला स्वेटर साथ रखें।
  10. कैमरा: संगम आरती की फोटोग्राफी के लिए ट्राइपॉड का उपयोग करना कठिन होगा, इसलिए ‘हैंडहेल्ड’ शॉट्स के लिए तैयार रहें।
  11. आंतरिक लिंक: रायपुर वापस जाते समय आप Nandanvan Zoo Naya Raipur भी देख सकते हैं।
  12. नकद (Cash): मेले में छोटे दुकानदारों के पास UPI नहीं होता, इसलिए छोटे नोट और कैश साथ रखें।
  13. पानी: अपनी पानी की बोतल साथ रखें, क्योंकि भीड़ में बार-बार पानी खरीदना मुश्किल हो सकता है।
  14. बच्चों का ख्याल: बच्चों के पॉकेट में अपना फोन नंबर लिखकर एक पर्ची डाल दें।
  15. साधु-संतों का सम्मान: साधुओं की फोटो खींचने से पहले उनकी अनुमति ज़रूर लें।
  16. रात का नज़ारा: मेले की असली रौनक रात में लाइटों के बीच होती है, कोशिश करें कि एक रात राजिम में रुकें।
  17. आंतरिक लिंक: यदि आप इतिहास प्रेमी हैं, तो यहाँ से Sirpur Heritage Site भी जा सकते हैं।
  18. कूड़ा-कचरा: महानदी को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य है। प्लास्टिक की बोतलें नदी में न फेंकें।
  19. दवाइयां: धूप से सिरदर्द या थकान हो सकती है, बेसिक फर्स्ट एड किट साथ रखें।
  20. आदिवासी कला: मेले के ‘शिल्प ग्राम’ से डोकरा या लोहे की कलाकृतियाँ खरीदें, यह स्थानीय कलाकारों की मदद होगी।
  21. शांति: मंदिरों के अंदर फोटो खींचना कभी-कभी मना होता है, बोर्ड पढ़ें।
  22. इमरजेंसी: मेले के पुलिस सहायता केंद्र का नंबर अपने पास रखें।
  23. नाव की सवारी: संगम के पार जाने के लिए नाव का रेट पहले ही तय कर लें।
  24. ग्रामीण अनुभव: पास के गाँवों में जाकर देखें कि वे मेले की तैयारी कैसे करते हैं।
  25. सोशल मीडिया: लाइव जाने के लिए माघ पूर्णिमा की सुबह सबसे बेस्ट है।
  26. आंतरिक लिंक: और झरनों के लिए Ghatarani Waterfall का लेख पढ़ें जो राजिम के पास ही है।
  27. ट्रेकिंग: कुलेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ियों पर सावधानी से चढ़ें।
  28. समय: राजीव लोचन मंदिर में दर्शन के लिए लंबी लाइन हो सकती है, 2-3 घंटे का समय हाथ में रखें।
  29. पावर बैंक: वीडियोग्राफी की वजह से फोन की बैटरी जल्दी खत्म होगी, पावर बैंक रखें।
  30. आईडी प्रूफ: अपनी पहचान पत्र (Aadhar Card) की एक कॉपी फोन में रखें।
  31. निष्कर्ष: राजिम मेला केवल एक स्थान नहीं, एक भावना है।

🏨 कहाँ रुकें और भोजन (Food & Accommodation)

राजिम मेले के दौरान रुकने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल (CHDTB) के ‘टूरिस्ट रिज़ॉर्ट’ सबसे अच्छे हैं। इसके अलावा:

  • राजिम शहर: यहाँ कई धर्मशालाएं और स्थानीय लॉज हैं, लेकिन Rajim Maghi Punni Mela 2026 dates के दौरान ये महीने भर पहले ही बुक हो जाते हैं।
  • रायपुर: सबसे अच्छा विकल्प है रायपुर में रुकना और सुबह जल्दी टैक्सी से राजिम आना।
  • भोजन: मेले के अंदर बने ‘फूड कोर्ट’ में छत्तीसगढ़ी व्यंजन ज़रूर खाएं। ‘फरा’ और ‘मुठिया’ यहाँ की खासियत हैं।

Q1: क्या राजिम मेले में प्रवेश शुल्क लगता है?

A: नहीं, राजिम मेला पूरी तरह निशुल्क है। केवल मंदिर दर्शन या झूलों के लिए आपको कतार या शुल्क देना पड़ सकता है।

Q2: क्या राजिम माघी पुन्नी मेला सुरक्षित है?

A: हाँ, राज्य सरकार यहाँ हज़ारों पुलिस बल और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

Q3: मेले में सबसे महत्वपूर्ण दिन कौन सा है?

A: सबसे महत्वपूर्ण दिन माघ पूर्णिमा (शुरुआत) और महाशिवरात्रि (समापन) हैं।

What is Rajim Maghi Punni Mela?

राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है, जो राजिम के त्रिवेणी संगम पर आयोजित होता है। इसे “छत्तीसगढ़ का कुंभ” भी कहा जाता है। यह मेला हर साल माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है, जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं और प्राचीन राजीव लोचन मंदिर के दर्शन करते हैं।

❤️ निष्कर्ष (Conclusion)

राजिम माघी पुन्नी मेला 2026 उन लोगों के लिए एक वरदान है जो छत्तीसगढ़ की असली आत्मा को देखना चाहते हैं। संगम की ठंडी रेत पर बैठकर महानदी की आरती देखना और कुलेश्वर महादेव के दर्शन करना एक ऐसा अनुभव है जो शब्दों से परे है। अतः, यदि आप 2026 में भारत के इस सांस्कृतिक महाकुंभ का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अभी से अपनी यात्रा की योजना बनाना शुरू कर दें।

Call to Action (CTA): क्या आप 2026 में राजिम मेले में शाही स्नान करने जा रहे हैं? अपने ग्रुप का नाम और अपनी प्लानिंग हमें कमेंट्स में बताएं! इस ‘मेगा गाइड’ को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिन्हें छत्तीसगढ़ की संस्कृति से प्यार है। 📢

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